Writer Pen About Cancer Treatment possible or not

cancer

Writer Pen About Cancer Treatment possible or not

प्रस्तावना

आज कैंसर शब्द से शायद ही कोई अपरिचित हो, प्रायः लोग इसके नाम से डरते है, उनका मानना है, कि यह एक लाइलाज बीमारी है बहुत ही खतरनाक बीमारी है। एक बार जिसे हो गया समझो कि उसके जीवन का अंत निकट है। परंतु इस पुस्तिका के माध्यम से हम आपकोे यही समझाना चाह रहे हैं, कि कैंसर क्या है? इसका उदगम कैसे हुआ और इससे निजात कैसे पाई जा सकती है? जी हां यह आधुनिक प्रदूषित वातावरण विकसित औधोगिककरण की देन है, अर्थात हमारे द्वारा किये जाने वाले प्रकृति से खिलवाड़ की उपज है। और इससे निजात पाने के लिए हमें प्रकृति की शरण में ही जाना होगा । हम सभी जानते है, कि धरती का प्रत्येक प्राणी अपने जीवन निर्वाह के लिए प्रकृति पर निर्भर होता है, और हमने, अपने उसी जीवन दायिनी प्रकृति का केमिकलाइजेशन कर दिया। परिणाम स्वरूप जीवन के तीन मुख्य आवश्यकताओं (शुद्ध पानी, शुद्ध हवा व शुद्ध भोजन) का भी कृत्रिमीकरण हो गया। आज हमें श्वसन के लिए शुद्ध हवा नहीं मिल पाती, पीने के लिए हम शुद्ध पानी के स्थान पर मशीनी पानी पाने को मजबूर है। और भोजन का हाल तो आपको पता ही है, किस कदर हम रसायनों के द्वारा धरती माता का दोहन कर रहे हैं। इन सबका खामियाजा भी तो हमें ही भुगतना होगा। कैंसर को आप अवांछित कोशिका वृद्धि के रूप जान सकते है, त्वचा के बाहर होने वाले घाव की तरह ही यह आंतरिक घाव होता है। अब जिस अंग में हो जाता है, उसी अंग के नाम से पुकारा जाने लगा है यदि आप इस बात से परिचित होंगें तो कभी भी कैंसर से भयभीत नहीं होगे। सही जानकारी के अभाव में यही जानलेवा भी बन सकता है। जबकि कुछ लोग अपनी खान-पान व दिनचर्या में परिवर्तन करते हुए पूर्ण जीवन जीते है। मान लीजिए कि आपके पास एक गंदे पानी का घड़ा है, आप उसे उठा नहीं कते, और आपको उस घड़़े के गंदे पानी के स्थान पर साफ पानी भरना है, आप क्या करेगें ? केवल एक ही उपाय है, उस घड़े में लगातार साफ पानी डालते जाये, पानी डालने पर अशुद्धियां धीरे-धीरे ऊपर आकर बह जायेंगी, और एक स्थिति ऐसी आयेगी कि गंदे पानी का घड़ा, साफ पानी के घड़े में बदल जायेगा। कैंसर रूपी घाव, वह गंदे पानी का घड़ा ही है, हम उसे पकड़कर नहीं निकाल सकते । परंतु साफ पानी की तरह हम शरीर को रसायन रहित, प्राकृतिक वातावरणों,

में उनकी प्राथमिक आवश्यकताओं की पूर्ति प्राकृतिक तरीके से करें। आपका शरीर पहले से भी अधिक स्वस्थ्य होगा। बस आवश्यकता है, थोड़ी समझदारी दिखाने की। जिस व्यक्ति को असंतुलन हो गया, घर के बाकी सदस्य उसका हौसला बढ़ायंे, कमजोर दिल वाले व्यक्ति को बीमारी का नाम न बतायें, थोड़ा दूसरे तरीके से दिलाशा दे। स्थान परिवर्तन कर दें। मौहाल बदलने का भी प्रभाव पड़ता है। जहां चाह वहां राह अवश्य मिलती है।

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